अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण

1. बायोमास पर आधारित विधुत परियोजनायें

प्रदेश शासन द्वारा इन परियोजनाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 1994 में एक नीति निर्धारित की गयी। कालान्तर में उ०प्र० विधुत नियामक आयोग के गठन के पश्चात आयोग द्वारा वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोमों की विधुत परियोजनाओं‚ जिनमें चीनी मिलों में को–जेनरेशन की परियोजनाएं भी सम्मिलित हैं‚ की स्थापना हेतु दिशा निर्देश‚ टैरिफ एवं अन्य शर्तों के निर्धारण के साथ साथ पावर कार्पोरेशन के साथ होने वाले पीपीए हेतु मॉडल पीपीए का निर्धारण किया गया है। प्रदेश की चीनी मिलों में इस तरह की परियाजनायें स्थज्ञिापित करने में अत्यधिक रूचि ली गई है। वित्तीय वर्ष 2013–14 के अन्त तक प्रदेश की 65 निजी चीनी मिलों द्वारा लगभग 1142-16 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं स्थापित की गयी है।
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2. लघु जल विधुत ऊर्जा कार्यक्रम

भारत सरकार के दिशा–निर्देशानुसार 25 मेगावाट क्षमता तक क परियोजनाएं लघु जल विधुत की श्रेणी में आती हैं। प्रदेश की प्रचलित लघु जल विधुत नीति – 2009 के अनुसार 15 मेगावाट तक यूपीनेडा एवं 15 मेगावाट से ऊपर की परियोजनाओं हेतु उत्तर प्रदेश जल विधुत निगत नोडल एजेंसी घोषित है।

प्रदेश में कैनाल फाल्स पर आधारित लघु जल विधुत परियाजनाओं के विकास हेतु प्रदेश सरकार द्वारा नीति घोषित की गयी है‚ जिसके मुख्य बिन्दु निम्नवत् है:
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3. पवन ऊर्जा कार्यक्रम

यूपीनेडा द्वारा भारत सरकार की वित्तीय सहायता से जनपद गोण्डा‚ बलरामपुर एवं सिद्धार्थनगर में 80 मीटर लेटिस विण्ड मास्ट की स्थापना की गई है। इन जपनदों में स्थापित तीनों विण्ड मास्ट संयंत्रों द्वारा जुलाई‚ 2014 से 80 मीटर पर विण्ड आंकड़े प्राप्त किये जाने का काय्र किया जा रहा है। इसके अलावा नेशनल इंस्टीट्यूट आफ विण्ड इनर्जी द्वारा प्रदेश में सम्भाव्य पोटेन्शियल हेतु प्राप्त आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

नेशनल इंस्टीट्यूट आफ विण्ड इनर्जी टेक्नोलॉजी‚ भारत सरकार द्वारा प्रारम्भिक अध्ययन के आधार पर घाघरा एवं शारदा नदियों में बेसिन में पवन ऊर्जा की सम्भावनाएं उपलब्ध है‚ जिसमें मुख्यतः शाहजहॉपुर‚ लखीमपुर खीरी‚ पीलीभीत‚ सीतापुर‚ बलरामपुर एवं सिद्धार्थनगर जिलों का भूभाग सम्मिलित है।
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4. सौर ऊर्जा कार्यक्रम

भारत सरकार सोलर मिशन फेस– 1 के अन्तर्गत जेनरेशन इंसंन्टिव स्कीम में भारत सरकार द्वारा निजी उधमियों को स्वीकृत 08 मेगावाट की परियोजनाओं के सापेक्ष 07 मेगावाट की परियोजनायें स्थापित हुई है। इसके अतिरिक्त 05 मेगावाट की परियोजना की स्थापना एक निजी उधमी द्वारा नैनी‚ इलाहाबाद में की गयी। इस प्रकार कुल 12 मेंगावाट क्षमता की ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर परियोजनायें स्थापित हो चुकी है। इसके अतिरिक्त एनटीपीसी द्वारा दादरी‚ जनपद गौतमबुद्धनगर में 05 मेगावाट एवं ऊॅचाहार‚ रायबरेली में 10 मेगावाट क्षमता की परियोजनायें स्थापित करायी गयी है।
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