अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण

  1. डिमांड साइड मैनेजमेट (डीएसएम)
  2. ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी)
  3. एनर्जी आडिट
  4. पर्फार्म एचीव एवं ट्रेड
  5. स्टार लेबल वाले उपकरण (एस एण्ड एल)

1. डिमांड साइड मैनेजमेट (डीएसएम)

  1. उत्तर प्रदेश में डीएसएम का काम
  2. कृषि डीएसएम
  3. नगर डीएसएम
  4. घरेलू कुशल प्रकाश कार्यक्रम

(a) कृषि डी एस एम

कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि पंपिंग क्षेत्र मे बाजार आधारित हस्तक्षेपों के लिए उपयुक्त ढांचे का निर्माण करना है और पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप (पीपीपी) मोड के माध्यम से पंप-सेट की दक्षता उन्नयन परियोजनाओं को पूरा करना है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना के शुरूआती दौर में, कृषि पंप की दक्षता बढ़ा कर कृषि पंपिंग क्षेत्र की ऊर्जा की तीव्रता को कम करना उद्देश्य था। लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हमारा दृष्टिकोण, 12वी योजना में टिकाऊ ऊर्जा दक्षता की गति की प्रक्रिया को बनाने के लिए था ः साधारण पंप सेट के मुकाबले में ऊर्जा दक्ष पंप सेट की कीमत के अंतर को नियामक तंत्र के माध्यम से व्यापक प्रतिकृति, भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता, हित धारको (स्टेक होलडर) की क्षमता निर्माण, ग्रामीण पेयजल पंपिंग सिस्टम में कुछ प्रदर्शन परियोजनाएं और परिणामों के प्रसार के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण आदि से, कम करना है।

(b) म्यूनिसिपल डिमांड साइड मैनेजमेंट (एमयूडीएसएम)

बीईई की नगरपालिका डिमांड साइट मैनेजमेंट (एमयूडीएसएम) की योजना ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान शुरू की गयी थी। बीईई नगर निगम के क्षेत्र में विशाल ऊर्जा बचत की सम्भावना को पहचान लिया है। परियोजना की मूल उद्देश्य शहरीय स्थानीय निकाय (यूएलबी) की समग्र ऊर्जा दक्षता में सुधार करना था, जिससे बिजली की खपत में पर्याप्त बचत हो सकती है, जिसके परिणाम स्वरूप शहरीय स्थानीय निकाय के लिए लागत मे कमी@बचत होती है।

(c)डीईएलपी- डीईएलपी योजना के तहत एलईडी वितरण

उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत सरकार के साथ एनर्जी एफिशिएनसी सर्विसेज लि0 (ईईएसएल) के सहयोग से उ0प्र0 राज्य में घरेलू कुशल प्रकाश कार्यक्रम शुरू किया है।

घरेलू कुशल प्रकाश कार्यक्रम (डीईएलपी) योजना, ऊर्जा के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने तथा आवासीय स्थल पर ऊर्जा दक्ष एलईडी प्रकाश का उपयोग बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन किये जाने पर केन्द्रित है। यह कार्यक्रम ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करने की प्रभावकारिता के बारे में उपभोक्ताओ की जागरूकता बढ़ाने की कोशिश करता है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य, प्रारम्भिक लागत कम करना और इस प्रकार आवासीय उपयोगकर्ताओं द्वारा एलईडी लाईट अधिक उपयोग सुविधाजनक बनाना, है।

डीईएलपी योजना के अंतर्गत प्रत्येक परिवार जिनका विद्युत भार 2 किलोवाट या कम है उन्हें 7 वाट के उच्च गुणवत्ता के 5 एलईडी बल्ब प्रदान किये जाएगें। जिन परिवार का विद्युत भार 2 किलोवाट से अधिक है उनकों 7 वाट के उच्च गुणवत्ता के 10 एलईडी बल्ब तक दिये जाएंगे।

डीईएलपी योजना के अंतर्गत या तो प्रत्येक एलईडी बल्ब हेतु रु. 10@- के शुरूआती भुगतान के साथ-साथ विद्युत बिल भुगतान के महीने से रु. 10@- प्रतिमाह की दर से 11 माह तक कुल रु. 110@- का भुगतान अथवा विद्युत बिल की प्रतिलिपि के साथ रु. 100@- प्रति बल्ब का अग्रिम भुगतान कर एलईडी बल्ब प्राप्त किया जा सकता है। यह योजना दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम, पूर्वाचल विद्युत वितरण निगम, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम तथा नोयडा पावर कार्पोरेशन लिमिटेड के क्षेत्रों में चलाई जा रही है और मार्च 2016 तक लगभग 1.01 करोड़ एलईडी लाईट बल्ब का वितरण किया जा चुका है। वर्ष 2017 में ईईएसएल द्वारा विभिन्न डिस्कॉम के माध्यम से उत्तर प्रदेश में 09 वाट एलईडी बल्ब रु. 60@- प्रति बल्ब, 20 वाट के एलईडी ट्यूब लाईट रु. 230@- प्रति ट्यूब एवं फाइव स्टार रेटिंग के 50 वाट के सीलिंग पंखे रु. 1150@- की दर से वितरित किये जा रहें है।

(2)ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी)

भवन निर्माण क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने की ओर पहले कदम के रूप में भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा मई 2007 में ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी) शुरू किया गया था। विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) के परामर्श से भारत के राज्यों में ईसीबीसी लागू कर रहा है। बीईई के दिशानिर्देशो के तहत विभिन्न हितधारको (स्टेक होलडर्स) जैसे आर्किटेक्टस्, शैक्षणिक संस्थानो, महत्वपूर्ण कन्सलटेण्टस् एवं विभिन्न सरकारी संगठनों से महत्वपूर्ण निविष्टियों के साथ ईसीबीसी विकसित किये गये थे। ईसीबीसी का उद्देश्य भवन में रहने वालों के आराम से समझौता किये बिना, ऊर्जा दक्ष डिजाइन और ऊर्जा दक्ष इमारतों का निर्माण और उनके सिस्टम के लिए न्यूनतम आवश्यकताएं प्रदान करना है।

नवीन भवन निर्माण

ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी), भारत सरकार द्वारा नये वाणिज्यिक भवनों के लिए 27 मई 2007 को विकसित किया गया था। ईसीबीसी वाणिज्यिक भवनों के लिए, जिनका विद्युत भार 100 किलोवाट या अधिक है अथवा अनुबंध मांग (कान्ट्रेक्ट डिमाण्ड) 120केवीए या अधिक है, न्यूनतम ऊर्जा मानको को निर्धारित करता है। जबकि केन्द्रीय सरकार के पास ईसी अधिनियम-2001 के तहत शक्तियां है, राज्य सरकारों के स्थानीय या क्षेत्रीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कोड को संशोधित करने और उन्हें सूचित करने का लचीलापन है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कोड की अधिसूचना अंतिम चरण में है।

विद्यमान भवन

विद्यमान भवन में ईसीवीसी कोड लागू करने पर लगभग 30 प्रतिशत तक विद्युत की बचत कर सकते है। इसके लिए हम विद्यमान भवन में रेट्रोफिटिंग कर सकते है और वर्तमान भवन को लगभग ईसीबीसी कोड के अनुरूप बना सकते है।

ईसीबीसी, निम्न के लिए डिजाइन मानदंड प्रदान करता है :-

  • दिवारो, छतों, खिड़कियों के लिए थर्मल प्रदर्शन आवश्यकताओं सहित बिल्डिंग लिफाफा।
  • दिन की रोशनी सहित प्रकाश व्यवस्था, लैम्पस एवं ल्यूमिनरीज की प्रदर्शन (परफार्मेन्स) आवश्यकताएं
  • एचवीएसी सिस्टम, हवा वितरण प्रणालियों के ऊर्जा प्रदर्शन (परफार्मेन्स) सहित।
  • विद्युत सिस्टम।
  • वाटर हीटिंग एवं पंपिंग सिस्टम, सोलर हॉट वाटर सिस्टम की आवश्यकता सहित।

भारत का पहला ईसीबीसी सेल यूपीएसडीए में स्थापित किया गया जिसका उद्देश्य ईसीबीसी कोड के प्रारूप तैयार करने, ईसीबीसी के बारे में जागरूकता तथा कुछ ईसीबीसी अनुवर्ती भवन का निर्माण डेमो प्रोजेक्ट के रूप में किया जाना जिससे यह बतलाया जा सके की ईसीबीसी अनुवर्ती भवन के निर्माण से ऊर्जा की बचत सम्भव है। उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) के कार्यालय भवन का निर्माण ईसीबीसी कोड के अनुसार किया गया है। इसका विस्तृत विवरण, भवन निर्माण सामग्री का उपयोग एवं वित्तीय विवरण निम्नानुसार है।

क्या आपका भवन एक ईसीबीसी अनुवर्ती भवन है?

  • उन लोगो के लिए जो जानना चाहते है कि उनका भवन ईसीबीसी अनुवर्ती भवन हो सकता है, संलग्नक (क) में उपलब्ध फार्म भर कर तथा अपने भवन की कुछ बुिनयादी विवरण भर कर हमें ई-मेल कर सकते है।
  • अनुबंध-A
  • जो लोग ईसीबीसी मापदंड के अनुरूप अपना भवन निर्माण के इच्छुक है वो संलग्नक (ख) में उपलब्ध फार्म भर कर ई-मेल कर सकते है।
  • अनुबंध-B
  • उन लोंगो के लिए जो ईसीबीसी मापदंड के अनुसार अपने मौजूदा भवन को रैट्रोफिटिंग द्वारा ईसीबीसी अनुवर्ती भवन के रूप में परिवर्तित करना चाहते है वो भी संलग्न फार्म भर कर ई-मेल कर सकते है।

उत्तर प्रदेश में ऊर्जा दक्ष भवन ईसीबीसी अनुवर्ती भवन को बढ़ावा देने के लिए निःशुल्क परामर्श प्रदान किया जाता है।

Email-id:

upnedaecbc@gmail.com

ho_rak@rediffmail.com

परफोर्मस, एचीव एवं ट्रेड (पीएटी) योजना तीन चरणों कार्यान्वित की जा रही है

  • पहले चरण में वर्ष 2012 से 2015 तक देश में 8 ऊर्जा सघन क्षेत्रो जैसे एल्यूमिनियम, सीमेंट,क्लोर-एलकली, उर्वरक, आयरन एण्ड स्टील, पल्प एण्ड पेपर, टेक्सटाइल तथा थर्मल पावर प्लाण्टों की 478 इकाईयों को पीएटी योजना में शामिल किया गया है।
  • द्वितीय चरण में वर्ष 2015 से 2018 तक 11 ऊर्जा सघन क्षेत्रों जैसे एल्यूमिनियम, सीमेंट, क्लोर-एलकली, उर्वरक, डिस्कॉम, आयरन एण्ड स्टील, पल्प एण्ड पेपर, रेलवे, रिफाइनरी, टेक्सटाइल तथा थर्मल पावर प्लाण्टों की 621 इकाईयों को शामिल किया गया है।

उत्तर प्रदेश राज्य के लिए 7 क्षेत्रों में पैट साइकिल 1 के अंतर्गत 27 उद्योगो को शामिल किया गया है।

  1. एल्यूमिनियम : 01
  2. सीमेंट: 02
  3. क्लोर-अल्कली: 01
  4. फर्टिलाइजर: 07
  5. आयरन एवं स्टील: 01
  6. पल्प एवं पेपर: 03
  7. थर्मल पावर प्लाण्ट ः: 12

अब, 11 सेक्टरों में पैट साइकिल 2 के अंतर्गत 27 से बढकर 47 उद्योग हो गये है।

  1. एल्यूमिनियम: 01
  2. सीमेंट: 03
  3. उर्वरक: 03
  4. डिस्कॉम: 05
  5. आयरन एण्ड स्टील : 01
  6. पल्प एण्ड पेपर : 03
  7. रेलवे : 03
  8. रिफाइनरी: 01
  9. टेक्सटाइल : 01
  10. थर्मल पावर प्लाण्ट : 18

पैट साइकिल 1 पूरा हो चुका है। पैट साइकिल 2 के अंतर्गत नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है। नये डीसी की पहचान की जा चुकी है।

5. स्टार लेबिल्ड उपकरण (एसएण्डएल)

उपभोक्ता को ऊर्जा की बचत के बारे में एक सूचित विकल्प प्रदान करने के लिए ब्यूरो ने वर्ष 2006 में विभिन्न सामग्री और उपकरणों के लिए मानक एवं लैबलिंग कार्यक्रम शुरू किया और इस प्रकार प्रासंगिक विपणन उत्पाद की लागत बचत क्षमता हेतु जागरूक किया। बीईई के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता लैबलिंग कार्यक्रम, उपभोक्ताओं के लिए प्रदान की जानी वाली सेवाओं को कम किये बिना उपकरण की ऊर्जा खपत को कम करना है।

एस एण्ड एल कार्यक्रम के तहत वर्गीकृत उपकरण :-

  1. फ्रॉस्ट फ्री (नो फ्रॉस्ट) रेफ्रिजरेटर
  2. ट्यूबलर फ्लोरोसेंट लैम्प
  3. कक्ष एयर कण्डीशनर
  4. वितरण ट्रांसफार्मर
  5. एलईडी बल्ब
  6. कमरा एयर कण्डीशनर (कैसेट, तल स्थायी टॉवर, छत, कॉर्नर एसी)
  7. प्रत्यक्ष कूल रेफ्रिजरेटर
  8. इण्डक्शन मोटर
  9. कृषि पम्प सेट
  10. छत के पंखे
  11. घरेलू तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) स्टोव
  12. इलेक्ट्रिक गीजर
  13. रंगीन टीवी
  14. वाशिंग मशीन
  15. कम्प्यूटर (नोट बुक/लैपटॉप)
  16. बैलास्ट (इलेक्ट्रानिक/चुंबकीय)
  17. कार्यालय उपकरण (प्रिंटर/कापीयर्स, स्कैनर, एमएफडी )
  18. कृषि उद्देश्यों के लिए डीजल इंजन संचालित मोनो- पम्प्स सेट
  19. सालिड स्टेट इन्वर्टर
  20. डीजल जनरेटर
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